Thursday, October 6, 2016

मैं

मुझे अपने तजुर्बे से ना नापो
मैं खुदही में एक तजुर्बा हूँ
मैं इंसान हूँ खुदा का बंदा हूँ
मैं कुदरत का एक अजूबा हूँ

मुझे वक़्त के दायरे में मत रोको
मेरा अंदाज समय का पाबंद नहीं
मुझे वक़्त के काँटो से मत टोको
मैं किसी दौर का मोहताज नहीं

मुझे अपनी उम्मीदों से ना लादो
मेरी अपनी उम्मीदें काफ़ी है
मेरे सपनों का कोई छोर नहीं
सपने तुम्हारे तो नाकाफी हैं

मुझे अपनी पेहचान से ना नवाजो
मेरी अलग यहाँ एक पेहचान है
मुझे अपने साए में पनाह ना दो
मेरे सर पर तो आसमान है
मेरे सर पर तो आसमान है