Monday, May 11, 2015

तीरंगा संभाल के

ए हिंदुस्तानी तू आज तय कर ले,
मरने के वादे ना कर बस इस देश के लिए थोडा जीं ले।
थोडा सोच देश का फिर तू अपना हीत कर ले।
पर भारत माँ के कुछ आँसू आज तू पीले।

प्रजासत्ताक ये देश स्वतंत्र अगणित बलीदानो से है।
तेरे घर के आंगन मे चैन लाखो कूर्बानीयो से है।
माना उनका कर्जदार तू कर्ज चुकाने की बात ना कर।
बस दो पल दिल से उनकी कूर्बानीया याद तो कर।

मासूम हाथ आज बेचेंगे तीरंगा।
तू खरीदना उनसे अपना वो तीरंगा।
लेहराना अदब से, वो मासूम खूश होंगे तूझसे।
उस खुशी में खुशी से बीकेगा हम सबका वो तीरंगा।

खुली फीजा मे लहराता, तीरंगा जो शान से
शान बचाने उसकी लढे कइ जी जान से।
ना कर अफसोस तू उनके शहीद होने पर
बस तीरंगा संभालना थोडा सा ध्यान से।

आज तू अपने दिल से तीरंगा लगाएगा।
अपने रोम रोम मे देश भक्ति जगाएगा।
इस देशभक्ति को खूदसे जूदा न होने देना।
जान से प्यारे उस तीरंगे को मिट्टी मे ना खोने देना।

।। जय हिंद ।।

Sunday, May 3, 2015

प्रिय सूरज भैय्या

प्रिय सूरज भैय्या,

ना जाने आपको किस बात का गुस्सा आया है
मेरे पसीने को आपने पानी की तरह बहाया है।
मेरी मानो रविकुमार कुछ देर आप सो जाओ
बस थंडा लेके बादलो के पीछे कुछ देर खो जाओ।

रात मे उस चंदा मामा की शीतल काया देखो
मूझे चैैन से जीने देने का सौजन्य उससे सीखो।
ये नं केहता मे हे अरूण के आप मूझे छोड जाओ
बस थंडा लेके बादलो के पीछे कुछ देर खो जाओ।

माना सर्दी की थंड मे आपकी गर्मी हमे सेहलाती है
पर फरवरी के आते यही गर्मी हमे झुलसाती है।
पिघल गया मै भानुप्रताप अब और न जलाओ
बस थंडा लेके बादलो के पीछे कुछ देर खो जाओ।

सूखा मेरा गला पानी की बूंद बूंद को तरसता है
लथपथ पसीने से बदन मेरा, अब अंग अंग सूलगता है।
छोडो ये हट दिवाकर और बीनती मेरी मान जाओ
बस थंडा लेके बादलो के पीछे कुछ देर खो जाओ।

आपका परमभक्त
कल्पक

घायल हुआ नेपाल



ये खेल तेरा है यहा चित और पट भी तेरी है
मे खेल सकू दाव मेरा इतनी जुर्रत कहा मेरी है ? 
तेरे पैतरे तू ही जाने ना बस इनपे मेरा चलता है
तूझसे होता सवेरा तूझीसे सूरज ढलता है



ये खेल तेरा है आज ये बात तूने दोहराई है 
भक्तपूर मे मातम की ये कैसी आफत आई है ?
दरहरा को आज तूमने आधे मे बाँट छोड दिया 
उन्नत नेपाल का हर सपना आज तूमने तोड दिया

हर गली मे मलवा यहा हर नुक्कड़ खंडहर है
हर गाव सूना अब हर बस्ती जरजर है
यहा लाश पडी हर चौखट पर, हर चौराह चीता जली
सुनहरे सवेरे को चीरकर मातम की ये शाम ढली

यहा सन्नाटा चीख रहा, तबाही का हाहाकार है
दूनिया पे रौब जमाता वो इंसान भी आज लाचार है
सपने दफन हूए मलवे मे, धुसर हुई आशाएं भी 
यहा वर्तमान धुँधला गया और भविष्य अंधकार है

ये खेल तेरा है यहा चीत और पट भी तेरी है
मे खेल सकू दाव मेरा इतनी जुर्रत कहा मेरी है ? 
आज फिरसे तेरी जीत हुई और हार गया इंसान 
माँ तेरी इस हरकत से घायल हुआ नेपाल

मुंबई


माना तुझे किसी चीज़ का डर नही, पर मुझे तेरी फिकर है
माना तू थमती नही कभी, पर तेरी रफ़्तार पे किसीकि नज़र है

माना तेरे हौसले बुलंद और इरादो मे जुनून है
माना तेरी आँचल मे मुझे मिलता सुकून है

मगर तेरे पर काटने की चाह कोई रखता है
मंज़िल से पहले उड़ान ना रुके, यही दर मुझे लगता है

तेरी बेपरवाह भीड़ मे तेरे दुश्मन छुपा करते है
तेरी ताकद वो जानते है सामने आने से डरते है

मगर उनके इरादे पक्के और नियत शैतानी है
भीड़मे छुपकर करनी उन्हे बेईमानी है
ये उनकी नासमझी और नादानी है
के मासूमों का खून बहाकर, उन्हे चोट तुझे पोह्चानि है

तेरे दुश्मनो के मंसूबों मे आज कल तेरा ही जीकर है
मुझे शक़ नही तेरी काबिलियत पे बस तेरी फिकर है

माँ..

इस दूनिया मे जब आया
खुदको तेरी गोद मे पाया
अब चलता हू राहो पर
तो संग है तेरी माया

जब जब चोट लगी मुझको
दर्द तेरे हिस्से मे भी आया
तेरे दर्द का एहसास 
पर मे ना कभी कर पाया

उंगली पकड़ कर लगबग लगबग
तूने चलना मुझे सिखाया
अ ब करते लब्ज़ सिखाए
मुहसे पापा तूने केहेलवाया

साइकल पर बैठ घंटी बजाता
तू पीछे पकड़कर चलती थी
गिर जाता जब साइकल से 
तब तेरी सूरत ढलती थी

गिर पड़कर तेरा सहारा लेकर
मेने जीना सीखा है
धुंधले से मेरे सपनो को
मेने तेरी आँखों मे देखा है

अब मे बड़ा हूँ तो तेरी गोद मे नही समाता 
राह पर चलते हुए तेरी उंगली नही पकड़ता 
साइकल तो बचपन के लिए थी अब मे वो नही चलता
काम मे होता हूँ बोहोत तो तेरे लिए वक़्त नही निकाल पाता 

पर माँ...

आज भी तेरे आँचल की ठंडक याद आती है
तूने सहलाया जब हातों से वो राहत याद आती है

आज भी दिल करता है तेरे पल्लू को पकड़कर चुप जाउ
आज भी कभी लगता है तेरी गोद मे सिर रख सो जाउ

आज भी मेरे सपनो को मेने तुझसे जोड़ रखा है
तेरी ममता क कंबल को मेने दिल पे ओढ़ रखा है

तूने दी है जिंदगी तुझसे मेरी हस्ती है
तू है तो दुनिया जन्नत है, वरना ये बस एक बस्ती है