मुझे अपने तजुर्बे से ना नापो
मैं खुदही में एक तजुर्बा हूँ
मैं इंसान हूँ खुदा का बंदा हूँ
मैं कुदरत का एक अजूबा हूँ
मुझे वक़्त के दायरे में मत रोको
मेरा अंदाज समय का पाबंद नहीं
मुझे वक़्त के काँटो से मत टोको
मैं किसी दौर का मोहताज नहीं
मुझे अपनी उम्मीदों से ना लादो
मेरी अपनी उम्मीदें काफ़ी है
मेरे सपनों का कोई छोर नहीं
सपने तुम्हारे तो नाकाफी हैं
मुझे अपनी पेहचान से ना नवाजो
मेरी अलग यहाँ एक पेहचान है
मुझे अपने साए में पनाह ना दो
मेरे सर पर तो आसमान है
मेरे सर पर तो आसमान है
Nice... Keep it up...
ReplyDeleteThank u buddy
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