Sunday, May 3, 2015

माँ..

इस दूनिया मे जब आया
खुदको तेरी गोद मे पाया
अब चलता हू राहो पर
तो संग है तेरी माया

जब जब चोट लगी मुझको
दर्द तेरे हिस्से मे भी आया
तेरे दर्द का एहसास 
पर मे ना कभी कर पाया

उंगली पकड़ कर लगबग लगबग
तूने चलना मुझे सिखाया
अ ब करते लब्ज़ सिखाए
मुहसे पापा तूने केहेलवाया

साइकल पर बैठ घंटी बजाता
तू पीछे पकड़कर चलती थी
गिर जाता जब साइकल से 
तब तेरी सूरत ढलती थी

गिर पड़कर तेरा सहारा लेकर
मेने जीना सीखा है
धुंधले से मेरे सपनो को
मेने तेरी आँखों मे देखा है

अब मे बड़ा हूँ तो तेरी गोद मे नही समाता 
राह पर चलते हुए तेरी उंगली नही पकड़ता 
साइकल तो बचपन के लिए थी अब मे वो नही चलता
काम मे होता हूँ बोहोत तो तेरे लिए वक़्त नही निकाल पाता 

पर माँ...

आज भी तेरे आँचल की ठंडक याद आती है
तूने सहलाया जब हातों से वो राहत याद आती है

आज भी दिल करता है तेरे पल्लू को पकड़कर चुप जाउ
आज भी कभी लगता है तेरी गोद मे सिर रख सो जाउ

आज भी मेरे सपनो को मेने तुझसे जोड़ रखा है
तेरी ममता क कंबल को मेने दिल पे ओढ़ रखा है

तूने दी है जिंदगी तुझसे मेरी हस्ती है
तू है तो दुनिया जन्नत है, वरना ये बस एक बस्ती है

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