मे खेल सकू दाव मेरा इतनी जुर्रत कहा मेरी है ?
तेरे पैतरे तू ही जाने ना बस इनपे मेरा चलता है
तूझसे होता सवेरा तूझीसे सूरज ढलता है
ये खेल तेरा है आज ये बात तूने दोहराई है
भक्तपूर मे मातम की ये कैसी आफत आई है ?
दरहरा को आज तूमने आधे मे बाँट छोड दिया
उन्नत नेपाल का हर सपना आज तूमने तोड दिया
हर गली मे मलवा यहा हर नुक्कड़ खंडहर है
हर गाव सूना अब हर बस्ती जरजर है
यहा लाश पडी हर चौखट पर, हर चौराह चीता जली
सुनहरे सवेरे को चीरकर मातम की ये शाम ढली
यहा सन्नाटा चीख रहा, तबाही का हाहाकार है
दूनिया पे रौब जमाता वो इंसान भी आज लाचार है
सपने दफन हूए मलवे मे, धुसर हुई आशाएं भी
यहा वर्तमान धुँधला गया और भविष्य अंधकार है
ये खेल तेरा है यहा चीत और पट भी तेरी है
मे खेल सकू दाव मेरा इतनी जुर्रत कहा मेरी है ?
आज फिरसे तेरी जीत हुई और हार गया इंसान
माँ तेरी इस हरकत से घायल हुआ नेपाल

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